पवित्र ग्रंथ

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संसार मे उपलब्ध तमाम पवित्र ग्रंथ क़ुरान ही हैं। जो एकेश्वर की गवाही देते हैं। तथा प्रत्येक ग्रंथ अपने युग के अनुरूप संविधान क़ायम करता है, एवंम जीवन यापन के मापदंड स्थापित करता है। ये ग्रंथ मानव और दानव को परिभाषित करते हैं।

          क़ुरान से पहले के ग्रंथों में जो भेद पैदा हुए वोह इसलिये कि मानव ने अपने स्वार्थ के लिये ईश्वर की लिपि को बदल डाला। क़ुरान इन ग्रंथों की इस अपूर्णता तथा नष्ट की गई लिपि को पुनः पूर्ण करने का स्रोत है।


رَّبِّ اَعُوۡذُ بِکَ مِنۡ ھَمَزٰتِ الشَّیٰطِیۡنِ ۙ وَ اَعُوۡذُ بِکَ رَبِّ اَنۡ یَّحۡضُرُوۡن ؕ ۔

بِسۡمِ اللّٰهِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِيۡمِۙ۔

आस्तिक का पवित्र ग्रंथों तथा सजा एंवम पुरष्कार में विश्वास

لٰـكِنِ الرّٰسِخُوۡنَ فِى الۡعِلۡمِ مِنۡهُمۡ وَالۡمُؤۡمِنُوۡنَ يُـؤۡمِنُوۡنَ بِمَاۤ اُنۡزِلَ اِلَيۡكَ وَمَاۤ اُنۡزِلَ مِنۡ قَبۡلِكَ‌ وَالۡمُقِيۡمِيۡنَ الصَّلٰوةَ‌ وَالۡمُؤۡتُوۡنَ الزَّكٰوةَ وَ الۡمُؤۡمِنُوۡنَ بِاللّٰهِ وَالۡيَوۡمِ الۡاٰخِرِ ؕ اُولٰٓٮِٕكَ سَنُؤۡتِيۡهِمۡ اَجۡرًا عَظِيۡمًا‏ ﴿۱۶۲﴾۔

[Q-04:162]

          परन्तु जो लोग उनमें से ज्ञान में पक्के हैं तथा जो ईमान वाले हैं। वो आपकी ओर उतारी गयी उस (पुस्तक क़ुर्आन) पर तथा आपसे पूर्व उतारी गई (पुस्तकों) पर ईमान रखते हैं और जो नमाज़ की स्थापना करने वाले, ज़कात देने वाले और अल्लाह तथा अन्तिम दिन पर ईमान रखने वाले हैं, उन्हीं को हम बहुत बड़ा प्रतिफल प्रदान करेंगे।(162)


يٰۤاَيُّهَا الَّذِيۡنَ اٰمَنُوۡۤا اٰمِنُوۡا بِاللّٰهِ وَرَسُوۡلِهٖ وَالۡكِتٰبِ الَّذِىۡ نَزَّلَ عَلٰى رَسُوۡلِهٖ وَالۡكِتٰبِ الَّذِىۡۤ اَنۡزَلَ مِنۡ قَبۡلُ‌ؕ وَمَنۡ يَّكۡفُرۡ بِاللّٰهِ وَمَلٰٓٮِٕكَتِهٖ وَكُتُبِهٖ وَرُسُلِهٖ وَالۡيَوۡمِ الۡاٰخِرِ فَقَدۡ ضَلَّ ضَلٰلًاۢ بَعِيۡدًا‏ ﴿۱۳۶﴾۔

[Q-04:136]      

            हे ईमान वालो! ईमान लाओ। अल्लाह और उसके रसूल पर, और उस पुस्तक (क़ुर्आन) पर जो उसने अपने रसूल पर उतारी है तथा उन पुस्तकों पर, जो इससे पहले उतारी हैं। जो कोई अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी पुस्तकों और क़यामत (प्रलय) को अस्वीकार करेगा, वह गुमराही (कुपथ) में बहुत दूर जा पड़ेगा।[136]


وَلَقَدۡ اٰتَيۡنَا مُوۡسَى الۡكِتٰبَ فَاخۡتُلِفَ فِيۡهِ‌ؕ وَلَوۡلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتۡ مِنۡ رَّبِّكَ لَـقُضِىَ بَيۡنَهُمۡ‌ؕ وَاِنَّهُمۡ لَفِىۡ شَكٍّ مِّنۡهُ مُرِيۡبٍ‏ ﴿۴۵﴾۔

[Q-41:45]

            तथा हम मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान कर चुके हैं । तो उसमें भी विभेद किया गया और यदि आपके पालनहार की ओर से एक बात पहले ही से निर्धारित न होती , तो उनके बीच निर्णय कर दिया जाता। निःसंदेह, वह इस [क़ुरान] से संदेह में डाँवाडोल हैं।
        1. अर्थात प्रलय के दिन निर्णय करने का वचन। वरना संसार ही में निर्णय कर दिया जाता और उन्हें कोई अवसर नहीं दिया जाता। (देखियेः सूरह फ़ातिर (35), आयतः45)

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सभी पवित्र ग्रंथ मानदंड, प्रकाश और मार्गदर्शन हैं।

وَلَـقَدۡ اٰتَيۡنَا مُوۡسٰى وَهٰرُوۡنَ الۡفُرۡقَانَ وَضِيَآءً وَّذِكۡرًا لِّـلۡمُتَّقِيۡنَۙ‏ ﴿۴۸﴾  الَّذِيۡنَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُمۡ بِالۡغَيۡبِ وَهُمۡ مِّنَ السَّاعَةِ مُشۡفِقُوۡنَ‏ ﴿۴۹﴾  وَهٰذَا ذِكۡرٌ مُّبٰرَكٌ اَنۡزَلۡنٰهُ‌ؕ اَفَاَنۡتُمۡ لَهٗ مُنۡكِرُوۡنَ‏ ﴿۵۰﴾۔

[Q-21:48-50]

            और हम मूसा तथा हारून को विवेक, प्रकाश और शिक्षाप्रद पुस्तक आज्ञाकारियों के लिए दे चुके हैं।(48)उन आज्ञाकारियों के लिए जो अपने रब से बिन देखे डरते हों और वे प्रलय से भी भयभीत हों।(49) और ये (क़ुर्आन) एक शुभ शिक्षा है, जिसे हमने उतारा है! तो क्या तुम इसके इन्कारी हो?(50)


وَلَقَدۡ اٰتَيۡنَا مُوۡسَى الۡكِتٰبَ فَلَا تَكُنۡ فِىۡ مِرۡيَةٍ مِّنۡ لِّقَآٮِٕهٖ‌ وَجَعَلۡنٰهُ هُدًى لِّبَنِىۡۤ اِسۡرَآءِيۡلَۚ‏ ﴿۲۳﴾۔

[Q-32:23]

            तथा हमने मूसा को किताब (तौरात) प्रदान की  तो आप उनके मिलने में किसी संदेह में न हों, तथा हमने उस (तौरात) को इस्राईल की संतान के लिए मार्गदर्शन बनाया।23”


وَلَقَدۡ اٰتَيۡنَا مُوۡسَى الۡهُدٰى وَاَوۡرَثۡنَا بَنِىۡۤ اِسۡرَآءِيۡلَ الۡكِتٰبَۙ‏ ﴿۵۳﴾ هُدًى وَّذِكۡرٰى لِاُولِى الۡاَلۡبَابِ‏ ﴿۵۴﴾۔

[Q-40:53-54]

      तथा हमने मूसा को मार्गदर्शन (तौरात) प्रदान की। और हमने इस्राईल की संतान को उस पुस्तक (तौरात) का उत्तराघिकारी बनाया।53” जो समझ वालों के लिए मार्गदर्शन तथा शिक्षा थी।

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कुरान अतीत में प्रकट  हुए पवित्र ग्रंथों की पुष्टि करता है।

وَهٰذَا كِتٰبٌ اَنۡزَلۡنٰهُ مُبٰرَكٌ مُّصَدِّقُ الَّذِىۡ بَيۡنَ يَدَيۡهِ وَلِتُنۡذِرَ اُمَّ الۡقُرٰى وَمَنۡ حَوۡلَهَا‌ ؕ وَالَّذِيۡنَ يُؤۡمِنُوۡنَ بِالۡاٰخِرَةِ يُؤۡمِنُوۡنَ بِهٖ‌ وَهُمۡ عَلٰى صَلَاتِهِمۡ يُحَافِظُوۡنَ‏ ﴿۹۲﴾۔

[Q-06:92]

            तथा ये (क़ुर्आन) एक पुस्तक है, जिसे हमने  उतारा है। जो शुभ तथा अपने से पूर्व (की पुस्तकों) को सच बताने वाली है, ताकि आप “उम्मुल क़ुरा” (मक्का नगर) तथा उसके चतुर्दिक (आस-पास) के निवासियों को सचेत  करें तथा जो परलोक के प्रति विश्वास रखते हैं, वही इसपर ईमान लाते हैं और वही अपनी नमाज़ों का पालन करते  हैं।92. 


 وَاَنۡزَلۡنَاۤ اِلَيۡكَ الۡكِتٰبَ بِالۡحَـقِّ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِ مِنَ الۡكِتٰبِ ﴿۴۸﴾۔

[Q-5:48]

           और (हे नबी!) हमने आपकी ओर सत्य पर आधारित पुस्तक (क़ुर्आन) उतार दी, जो अपने पूर्व की पुस्तकों को सच बताने वाली है। 48”

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पवित्र पुस्तकें परमेश्वर के वचन और नियम हैं।

بِالۡبَيِّنٰتِ وَالزُّبُرِ‌ؕ وَاَنۡزَلۡنَاۤ اِلَيۡكَ الذِّكۡرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ اِلَيۡهِمۡ وَلَعَلَّهُمۡ يَتَفَكَّرُوۡنَ‏ ﴿۴۴﴾۔ 

[Q-16:44]

           [और हमने रसूलों को] प्रत्यक्ष (खुले) प्रमाणों तथा पुस्तकों के साथ (भेजा) और आपकी ओर ये शिक्षा (क़ुर्आन) अवतरित की। तथा जो कुछ आप की ओर उतारा (नाज़िल किया) गया है, इसलिये कि! आप उसे सर्वमानव के लिए उजागर कर दें,  ताकि वे सोच-विचार करें।

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क़ुरान! पूर्व पवित्र पुस्तकों को पढ़ने का लेंस है।

اِنَّ هٰذَا الۡقُرۡاٰنَ يَقُصُّ عَلٰى بَنِىۡۤ اِسۡرَآءِيۡلَ اَكۡثَرَ الَّذِىۡ هُمۡ فِيۡهِ يَخۡتَلِفُوۡنَ‏ ﴿۷۶﴾  وَاِنَّهٗ لَهُدًى وَّرَحۡمَةٌ لِّلۡمُؤۡمِنِيۡنَ‏ ﴿۷۷﴾۔

[Q-27:76-77]

          निःसंदेह, ये क़ुर्आन इस्राईल की संतान के समक्ष, उन अधिक्तर बातों का वर्णन कर रहा है जिनमें वे विभेद कर रहे हैं।76” और वास्तव में, यह ईमान वालों के लिए, मार्गदर्शन तथा दया है। 77”


وَاَنۡزَلۡنَاۤ اِلَيۡكَ الۡكِتٰبَ بِالۡحَـقِّ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِ مِنَ الۡكِتٰبِ وَمُهَيۡمِنًا عَلَيۡهِ‌ فَاحۡكُمۡ بَيۡنَهُمۡ بِمَاۤ اَنۡزَلَ اللّٰهُ ﴿۴۸﴾

[Q-5:48]

          और (हे नबी!) हमने आपकी ओर सत्य पर आधारित पुस्तक (क़ुर्आन) उतार दी, जो अपने पूर्व की पुस्तकों को सच बताने वाली तथा उनकी संरक्षक  है, अतः आप लोगों का निर्णय उसी से करें, जो अल्लाह ने आप ﷺ उतारा है । 48”

            संरक्षक होने का अर्थ यह है कि क़ुर्आन अपने पूर्व की धर्म पुस्तकों का केवल पुष्टिकर ही नहीं, कसौटि (परख) भी है। अतः आदि पुस्तकों में जो भी बात क़ुर्आन के विरुध्द होगी, वह सत्य नहीं परिवर्तित होगी, सत्य वही होगी जो अल्लाह की अन्तिम किताब क़ुरआन पाक के अनुकूल है।


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