अल्लाह के रसूलों का रास्ता।

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رَّبِّ اَعُوۡذُ بِکَ مِنۡ ھَمَزٰتِ الشَّیٰطِیۡنِ ۙ وَ اَعُوۡذُ بِکَ رَبِّ اَنۡ یَّحۡضُرُوۡن ؕ ۔

بِسۡمِ اللّٰهِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِيۡمِۙ۔

पेगम्बरों और वहयी (प्रकाशना) भेजने का लक्ष्य। 

اِنَّاۤ اَوۡحَيۡنَاۤ اِلَيۡكَ كَمَاۤ اَوۡحَيۡنَاۤ اِلٰى نُوۡحٍ وَّالنَّبِيّٖنَ مِنۡۢ بَعۡدِهٖ‌ۚ وَاَوۡحَيۡنَاۤ اِلٰٓى اِبۡرٰهِيۡمَ وَاِسۡمٰعِيۡلَ وَاِسۡحٰقَ وَيَعۡقُوۡبَ وَالۡاَسۡبَاطِ وَعِيۡسٰى وَاَيُّوۡبَ   وَيُوۡنُسَ وَهٰرُوۡنَ وَسُلَيۡمٰنَ‌  ۚ  وَاٰتَيۡنَا دَاوٗدَ زَبُوۡرًا  ۚ (۱۶۳)  وَرُسُلًا قَدۡ قَصَصۡنٰهُمۡ عَلَيۡكَ مِنۡ قَبۡلُ وَرُسُلًا لَّمۡ نَقۡصُصۡهُمۡ عَلَيۡكَ‌ۚ  وَكَلَّمَ اللّٰهُ مُوۡسٰى تَكۡلِيۡمًا  ۚ‏ (۱۶۴)  رُسُلًا مُّبَشِّرِيۡنَ وَمُنۡذِرِيۡنَ لِئَلَّا يَكُوۡنَ لِلنَّاسِ عَلَى اللّٰهِ حُجَّةٌ ۢ بَعۡدَ الرُّسُلِ‌ؕ وَكَانَ اللّٰهُ عَزِيۡزًا حَكِيۡمًا‏ (۱۶۵)۔

[Q-4:163-165]

          (हे नबी!) हमने आपकी ओर वैसे ही वह़्यी भेजी है, जैसे नूह़ और उसके पश्चात के रसूलों के पास भेजी और इब्राहीम, और इस्माईल, और इस्ह़ाक़, और याक़ूब तथा उसकी संतान, और ईसा, और अय्यूब, और यूनुस, और हारून और सुलैमान के पास वह़्यी भेजी और हमने दाऊद को ज़बूर प्रदान की थी।(163) कुछ रसूल तो ऐसे हैं, जिनकी चर्चा हम इससे पहले आपसे कर चुके हैं और कुछ की चर्चा आपसे नहीं की है और अल्लाह ने मूसा से वास्तव में बात की।(164) ये सभी रसूल शुभ सूचना सुनाने वाले और डराने वाले थे, ताकि इन रसूलों के (आगमन के) पश्चात् लोगों के लिए अल्लाह पर कोई तर्क रह जाये और अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वज्ञ (ग़ालिब हिकमत वाला) है।(165)


يٰبَنِىۡۤ اٰدَمَ اِمَّا يَاۡتِيَنَّكُمۡ رُسُلٌ مِّنۡكُمۡ يَقُصُّوۡنَ عَلَيۡكُمۡ اٰيٰتِىۡ‌ۙ فَمَنِ اتَّقٰى وَاَصۡلَحَ فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُوۡنَ‏ (۳۵)  وَالَّذِيۡنَ كَذَّبُوۡا بِاٰيٰتِنَا وَاسۡتَكۡبَرُوۡا عَنۡهَاۤ اُولٰۤٮِٕكَ اَصۡحٰبُ النَّارِ‌ۚ هُمۡ فِيۡهَا خٰلِدُوۡنَ‏ (۳۶)۔

[Q-07:35-36]

            हे आदम के पुत्रो! जब तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल आ जायें जो तुम्हें मेरी आयतें सुना रहे हों, तो जो डरेगा और अपना सुधार कर लेगा, उसके लिए कोई डर नहीं होगा और न वे  ग़मगीन होंगे।(35) और जो हमारी आयतें झुठलायेंगे और उनसे घमण्ड करेंगे वही नारकी (दोजखी) होंगे और वही उसमें सदावासी होंगे।(36)

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नबियों ने दुनिया के हर समुदाय में अल्लाह का संदेश पहुँचाया।

وَكَذٰلِكَ مَاۤ اَرۡسَلۡنَا مِنۡ قَبۡلِكَ فِىۡ قَرۡيَةٍ مِّنۡ نَّذِيۡرٍ اِلَّا قَالَ مُتۡرَفُوۡهَاۤ اِنَّا وَجَدۡنَاۤ اٰبَآءَنَا عَلٰٓى اُمَّةٍ وَّاِنَّا عَلٰٓى اٰثٰرِهِمۡ مُّقۡتَدُوۡنَ‏ (۲۳)  قٰلَ اَوَلَوۡ جِئۡتُكُمۡ بِاَهۡدٰى مِمَّا وَجَدْتُّمۡ عَلَيۡهِ اٰبَآءَكُمۡ‌ ؕ قَالُوۡۤا اِنَّا بِمَاۤ اُرۡسِلۡـتُمۡ بِهٖ كٰفِرُوۡنَ‏ (۲۴)  فَانْتَقَمۡنَا مِنۡهُمۡ‌ فَانْظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَاقِبَةُ الۡمُكَذِّبِيۡنَ (۲۵)۔

[Q-43:23-25]

             इसी प्रकार कोई बस्ती [नहीं] कि [जहाँ आप ﷺ] से पूर्व कोई सावधान करने वाला नहीं भेजा हो, परन्तु वहाँ के सुखी लोगों ने कहा हमने अपने पूर्वजों को एक रीति पर पाया है और हम निश्चय ही उन्हीं के पद्चिन्हों पर चल रहे हैं।(23) नबियों ने कहाः क्या (तुम उन्हीं का अनुगमन करोगे) यद्पि मैं लाया हूँ तुम्हारे पास उससे अधिक सीधा मार्ग, कि जिसपर तुमने पाया है अपने पूर्वजों को? तो उन्होंने कहाः हम उसे मानने वाले नहीं है जिस (धर्म) के साथ तुम भेजे गये हो, ।(24) अन्ततः, हमने बदला चुका लिया उनसे। तो देखो कि कैसा रहा झुठलाने वालों का दुष्परिणाम।(25)

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प्रत्येक क़ौम का नबी उन्ही मे से चुना गया।

وَمَاۤ اَرۡسَلۡنَا مِنۡ رَّسُوۡلٍ اِلَّا بِلِسَانِ قَوۡمِهٖ لِيُبَيِّنَ لَهُمۡ‌ؕ فَيُضِلُّ اللّٰهُ مَنۡ يَّشَآءُ وَيَهۡدِىۡ مَنۡ يَّشَآءُ‌ ؕ وَهُوَ الۡعَزِيۡزُ الۡحَكِيۡمُ‏ (۴)۔

[Q-14:04]

           और हमने प्रत्येक  रसूल को उसकी जाति की भाषा ही में भेजा, ताकि वह उनके लिए बात [सरलता से] समझा सके। फिर अल्लाह जिसे चाहता है, कुपथ करता है और जिसे चाहता है, सुपथ दर्शा देता है और वही प्रभुत्वशाली और ह़िक्मत वाला है।(4)


قَالَتۡ لَهُمۡ رُسُلُهُمۡ اِنۡ نَّحۡنُ اِلَّا بَشَرٌ مِّثۡلُكُمۡ وَلٰـكِنَّ اللّٰهَ يَمُنُّ عَلٰى مَنۡ يَّشَآءُ مِنۡ عِبَادِهٖ ؕ  وَمَا كَانَ لَنَاۤ اَنۡ نَّاۡتِيَكُمۡ بِسُلۡطٰنٍ اِلَّا بِاِذۡنِ اللّٰهِ ؕ  وَعَلَى اللّٰهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ الۡمُؤۡمِنُوۡنَ‏ (۱۱)۔

[Q-14:11]

       उनसे उनके रसूलों ने कहाः हम तुम्हारे जैसे मानव पुरुष ही हैं, परन्तु अल्लाह अपने भक्तों में से जिसपर चाहे, [नब्वत का] उपकार करता है और हमारे बस में नहीं कि अल्लाह की अनुमति के बिना कोई प्रमाण [मोज़्ज़ा/चमत्कार] ले आयें और अल्लाह ही पर ईमान वालों को भरोसा करना चाहिए।(11)

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तमाम पेगम्बरों को अल्लाह उनकि उम्मत के प्रति जवाबदेय बनाता है।

وَاِذۡ اَخَذۡنَا مِنَ النَّبِيّٖنَ مِيۡثَاقَهُمۡ وَمِنۡكَ وَمِنۡ نُّوۡحٍ وَّاِبۡرٰهِيۡمَ وَمُوۡسٰى وَعِيۡسَى ابۡنِ مَرۡيَمَ ࣕ وَاَخَذۡنَا مِنۡهُمۡ مِّيۡثاقًا غَلِيۡظًا ۙ‏ ﴿۷﴾  لِّيَسۡئَلَ الصّٰدِقِيۡنَ عَنۡ صِدۡقِهِمۡ‌ۚ  (۸)۔

[Q-33:7-8]

              तथा (याद करो) जब हमने नबियों से उनका वचन लिया तथा आप ﷺ से और नूह़, और  इब्रीम, और  मूसा, और मर्यम के पुत्र ईसा से, और हमने उनसे दृढ़ वचन लिया।(7) ताकि सचों से उनकी सच्चाई के संबन्ध में प्रश्न करे। (8)

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सभी पेगम्बर पुरुष ही थे।

وَمَاۤ اَرۡسَلۡنَا مِنۡ قَبۡلِكَ اِلَّا رِجَالًا نُّوۡحِىۡۤ اِلَيۡهِمۡ مِّنۡ اَهۡلِ الۡقُرٰى‌ؕ (۱۰۹)۔

[Q-12:109]

       और हमने आपसे पहले मानव  पुरुषों ही को नबी बनाकर भेजा, जिनकी ओर प्रकाशना (वह्यी) भेजते रहे,(109)


 وَمَاۤ اَرۡسَلۡنَا مِنۡ قَبۡلِكَ اِلَّا رِجَالًا نُّوۡحِىۡۤ اِلَيۡهِمۡ‌ فَسۡـــَٔلُوۡۤا اَهۡلَ الذِّكۡرِ اِنۡ كُنۡتُمۡ لَا تَعۡلَمُوۡنَۙ‏ (۴۳)  بِالۡبَيِّنٰتِ وَالزُّبُرِ‌ؕ وَاَنۡزَلۡنَاۤ اِلَيۡكَ الذِّكۡرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ اِلَيۡهِمۡ وَلَعَلَّهُمۡ يَتَفَكَّرُوۡنَ‏ (۴۴)۔

[Q-16:43-44]

            और (हे नबी!) हमने आपसे पहले जो भी रसूल भेजे, वे सभी मानव-पुरुष थे। जिनकी ओर हम वह़्यी (प्रकाशना) करते रहे। तो तुम ज्ञानियों से (किताब वालों से) पूछ लो, यदि (स्वयं) नही  जानते।(43)  [और उन रसूलों को] प्रत्यक्ष (खुले) प्रमाणों तथा पुस्तकों के साथ (भेजा) और आपकी ओर ये शिक्षा (क़ुर्आन) अवतरित की। तथा जो कुछ आप की ओर उतारा (नाज़िल किया) गया है, इसलिये कि! आप उसे सर्वमानव के लिए उजागर कर दें,  ताकि वे सोच-विचार करें।

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आदम से लेकर मुहम्मद तक अल्लाह का एक ही संदेश।

سُنَّةَ مَنۡ قَدۡ اَرۡسَلۡنَا قَبۡلَكَ مِنۡ رُّسُلِنَا‌ وَلَا تَجِدُ لِسُنَّتِنَا تَحۡوِيۡلًا (۷۷)۔

[Q-17:77]

            जिन्हे हमने आपसे पहले अपने रसूलों में से भेजा है उनके लिये भी [यही] नियम (एकेश्वर) रहे हैं। और आप हमारे नियम में कोई परिवर्तन नहीं पायेंगे।(77)


وَمَاۤ اَرۡسَلۡنَا مِنۡ قَبۡلِكَ مِنۡ رَّسُوۡلٍ اِلَّا نُوۡحِىۡۤ اِلَيۡهِ اَنَّهٗ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّاۤ اَنَا فَاعۡبُدُوۡنِ‏ (۲۵)۔

[Q-21:25]

            और हमने आप ﷺ से पहले जो रसूल भेजे, उनकी ओर यही वह़्यी (प्रकाशना) करते रहे कि मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं है। अतः मेरी ही इबादत (वंदना) करो।(25)


مَا يُقَالُ لَـكَ اِلَّا مَا قَدۡ قِيۡلَ لِلرُّسُلِ مِنۡ قَبۡلِكَ ‌ؕ اِنَّ رَبَّكَ لَذُوۡ مَغۡفِرَةٍ وَّذُوۡ عِقَابٍ اَ لِيۡمٍ‏ ﴿۴۳﴾۔

[Q-41:43]

            आपसे वही कहा जा रहा है, जो आपसे पूर्व रसूलों से कहा गया।  वास्तव में, आपका पालनहार क्षमा करने (तथा) दुःखदायी य़ातना देने वाला है।43-


اِقۡتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمۡ وَهُمۡ فِىۡ غَفۡلَةٍ مُّعۡرِضُوۡنَ‌ۚ‏ (۱)  مَا يَاۡتِيۡهِمۡ مِّنۡ ذِكۡرٍ مِّنۡ رَّبِّہِمۡ مُّحۡدَثٍ اِلَّا اسۡتَمَعُوۡهُ وَهُمۡ يَلۡعَبُوۡنَۙ‏ (۲)۔

[Q-21:1-2]

             लोगों के हिसाब  का समय समीप आ गया है, जबकि वे अचेतना में मुँह फेरे हुए हैं।(1) उनके पास, उनके रब की ओर से कोई नई शिक्षा नहीं आती, परन्तु वो उसे खेलते हुए (बेपरवाह होकर) सुनते हैं।(2)

             [आथार्त आप ﷺ जो धर्म आया, वही भूतकाल मे सभी देवदूत (नबियों) पर आया। कि अपने धर्म को शुद्ध करते हुए एक ईश्वर की पूजा करो।]


يٰۤاَيُّهَا الَّذِيۡنَ اٰمَنُوۡۤا اٰمِنُوۡا بِاللّٰهِ وَرَسُوۡلِهٖ وَالۡكِتٰبِ الَّذِىۡ نَزَّلَ عَلٰى رَسُوۡلِهٖ وَالۡكِتٰبِ الَّذِىۡۤ اَنۡزَلَ مِنۡ قَبۡلُ‌ؕ وَمَنۡ يَّكۡفُرۡ بِاللّٰهِ وَمَلٰٓٮِٕكَتِهٖ وَكُتُبِهٖ وَرُسُلِهٖ وَالۡيَوۡمِ الۡاٰخِرِ فَقَدۡ ضَلَّ ضَلٰلًاۢ بَعِيۡدًا‏ (۱۳۶)۔

[Q-04:136]

            हे ईमान वालो! ईमान लाओ। अल्लाह और उसके रसूल पर, और उस पुस्तक (क़ुर्आन) पर जो उसने अपने रसूल पर उतारी है तथा उन पुस्तकों पर, जो इससे पहले उतारी हैं। जो कोई अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी पुस्तकों और क़यामत (प्रलय) को अस्वीकार करेगा, वह गुमराही (कुपथ) में बहुत दूर जा पड़ेगा।[136]


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